लॉकडाउन के 60 दिनों में हमें 140 घंटे की ट्रेनिंग दी गई, ये भी बताया गया कि फ्लाइट में संदिग्ध मिले तो क्या करना है

लंबे लॉकडाउन के बादसोमवार को पहली पैसेंजर फ्लाइट उड़ान भरेगी। एयरपोर्ट स्टाफ से केबिन क्रू और पायलट तक सबतैयारी कर रहे हैं। इंडिगो के प्रमुख ने तो इस तैयारी की तुलना मिलिट्री ऑपरेशन से की। आखिर सवाल जिंदगी का है। इस बार जब कोई हवाई यात्रा करेगा तो डिपार्चर गेट से लेकर सिक्योरिटी, टिकटिंग और बोर्डिंग तक सबकुछ बदला होगा। हर कदम के साथ कोरोना से जुड़े कुछ एहतियात साथ होंगे। इन्हीं सब बदलावों को लेकर भास्कर ने एयर एशिया के पायलट और केबिन क्रू सदस्यों से बात की।

पहला इंटरव्यू - प्रणव सूद, (पायलट, एयर एशिया)

मैंने आखिरी एयरक्राफ्ट 25 मार्च को उड़ाया था। दो महीने बाद अब फिर हमारा ऑपरेशन शुरू होने जा रहा है। पिछले 60 दिनों में हमने करीब 140 घंटे की ट्रेनिंग ली है। इसमें टेक्निकल पार्ट के साथ ही कोरोनावायरस को लेकर दी गई ट्रेनिंग भी शामिल है।

कोरोनावायरस को लेकर किन बातों को फॉलो करना है। खुद को क्या सावधानियां रखनी हैं। संदिग्ध व्यक्ति के फ्लाइट में मिलने पर क्या करना है, यह बातें हमें बताई गई हैं। पायलट से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक को एक-एक पॉइंट बारीकी से समझाया गया है। यहां मैं आपको पायलट के रोल के बारे में बता रहा हूं।

घर से निकलने से पहले फॉर्म भरना होगा
अब हमें घर से निकलने से पहले एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। उसमें बताना है कि मैं कोविड-19 का शिकार नहीं हुआ हूं। कंटेनमेंट एरिया से भीनहीं हूं। मैं किसी संदिग्ध के संपर्क में भी नहीं आया। यह फॉर्म भरने के बाद मेरे मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। यह ओटीपी हमें एयरपोर्ट पर तैनात हमारे डॉक्टर को दिखाना होगा। फिर वे वेरिफाई करेंगे कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं। टेम्परेचर चेक करेंगे। इसके बाद ही हमें एयरक्राफ्ट में जा सकेंगे।

सबसे जरूरी काम एटीसी तक जानकारी पहुंचाना

हमारा काम जहाज में जाने के बाद शुरू होता है। सबसे जरूरी है इंफॉर्मेशन सही समय पर सही जगह पहुंचाना। हमें केबिन क्रू से जैसे ही किसी भी संदिग्ध यात्री की जानकारी मिलेगी, हमें उसे तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को भेजना है। कंपनी के चीफ मेडिकल ऑफिसर ने केबिन क्रू और पायलट्स को बताया कि संदिग्ध मरीज को आइडेंटिफाई कैसे करना है। जैसे कोई भी बीमार दिख रहा है। सर्दी-खांसी है तो सबसे पहले क्रू मेम्बर उसका टेम्परेचर चेक करेंगी। इसकी जानकारी पायलट को दी जाएगी। इस जानकारी को हम एटीसी को भेजेंगे। ताकि जहाज के लैंड करने से पहले वहां हेल्थ टीम मुस्तैद रहे और संबंधित व्यक्ति को किस तरह से हैंडल करना है यह तय हो जाए। हर पैसेंजर का पीएनआर और मोबाइल नंबर हमारे पास होगा। ऐसे में सरकार बाद में संदिग्ध पैसेंजर या उससे आसपास के यात्रियों के बारे में भी कोई भी जानकारी मांगती है तो हम दे पाएंगे।

देशभर में 25 मार्च से घरेलू उड़ाने बंद हैं। 2 महीने बाद 25 मई से ये उड़ाने फिर से शुरू हो रही हैं।

कॉकपिट में अब सिर्फ दो टीम के लोग आ सकेंगे

कॉकपिट की डीप क्लीनिंग इंजीनियरिंग द्वारा की जाती है। इसके बाद हमें खुद भी कॉकपिट को अपने लेवल पर सैनिटाइज करना है। अभी कॉकपिट में हमारे चार लोग इंजीनियरिंग, सिक्योरिटी, केबिन क्रू और ग्राउंड सर्विस को आना अलाउ था। अब सिर्फ इंजीनियरिंग और केबिन क्रू ही आएंगे। ये भी अधिकतम दो बार ही कॉकपिट में आ सकते हैं। हर फ्लाइट के बाद जहाज को 10 से 15 मिनट के अंदर डिसइंफेक्ट किया जाएगा।

सिम्यूलेटर में हुई ट्रेनिंग
अभी हमारा सिम्यूलेटर सेशन भी हुआ है। इसमें एकदम असली एयरक्राफ्ट की तरह दिखने वाले जहाज में ट्रेनिंग दी जाती है। वैसे यह 6 माह में एक बार होती थी लेकिन कोविड के चलते अभी हुई है। क्योंकि दो महीने से एयरक्राफ्ट नहीं उड़ाया तो हर चीज रिवाइज करवाई गई है ताकि किसी भी तरह की प्रॉब्लम न आए। अब हम लोग हवा में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। घरवाले भी सब जान चुके हैं। अवेयर हो चुके हैं इसलिए अब टेंशन नहीं ले रहे। हम पूरी सावधानी रखते हुए काम शुरू करने जा रहे हैं। घर आकर बिना किसी को टच किए सीधे नहाएंगे और कपड़े वॉश करेंगे। इसके बाद ही किसी से भी घर में मिलेंगे।

दूसरा इंटरव्यू - ऋचा मेहता, केबिन क्रू, एयर एशिया

हमारे ट्रेनिंग सेशन मार्च के आखिरी हफ्ते से ही शुरू हो गए थे। वैसे ट्रेनिंग रेग्युलर होती है लेकिन इस बार कोविड-19 का चैप्टर भी इसमें जुड़ गया। पहले ट्रेनिंग सेंटर्स पर ट्रेनिंग हुआ करती थी, इस बार कोविड के चलते ऑनलाइन हुई। मेरे आठ साल के करियर में पहली बार मैं दो महीने तक घर पर रही हूं।

ट्रेनिंग में हमें कई बातें बताई गई हैं। चीफ मेडिकल ऑफिसर ने हमारे कई सेशन लिए। हमें सबसे ज्यादा ध्यान सोशल डिस्टेंसिंग का रखना है। हमारी सोशल डिस्टेंसिंग घर से निकलते ही शुरू हो जाएगी। मास्क और ग्लव्स पहनकर ही ऑफिस जाना है। कम से कम 2 मीटर का डिस्टेंस सभी से रखना है। फ्लाइट में पैसेंजर्स को सेफ्टी किट्स बांटी जाएंगी। इसमें फेशियल मास्क, फेशियल शील्ड, सैनिटाइजर पाउच और एक डिस्पोजेबल बैग होगा।

एयर एशिया कीकेबिन क्रूऋचा मेहता बताती हैं कि पिछले 2 महीने में हुई ऑनलाइन ट्रैनिंग में ज्यादातर हिस्सा कोविड-19 से बचाव के तरीकों पर फोकस्ड रहा।

ऑन-बोर्ड पानी के अलावा कुछ भी सर्व नहीं किया जाएगा। लेकिन इमरजेंसी में यात्रियों के लिए चीजें रहेंगी। हमें ट्रेनिंग में बताया गया है कि कोई भी संदिग्ध यात्री दिखता है तो उसे तुरंत अलग करना है। हम प्रोटेक्टिव किट से कवर होंगे। गाउन, मास्क, ग्लव्स और शूज कवर से पैक होंगे। संदिग्ध यात्री दिखने पर उसका टेम्परेचर लिया जाएगा। इसकी जानकारी पायलट को दी जाएगी। ऐसे यात्री को किसी खाली सीट पर अकेले बिठाया जा सकता है।

जहाज को सैनिटाइज करने का काम भी हमारा होगा। इस काम में हमारे साथ ग्राउंड हैंडलिंग टीम भी होगी। हमें अलग-अलग सिचुएशन के बारे में बताया गया है। जैसे इमरजेंसी में जब किसी को ब्रीथ (सांस) देना होती थी पहले हम माउथ टू माउथ ऐसा करते थे लेकिन अब नहीं कर पाएंगे। यह काम अब हम ऑक्सीजन बॉटल या डिवाइस के जरिए करेंगे। किसी अन्य मामले में भी जहाज में किसी की तबियत खराब हो जाती है तो हमें उसे पूरी तरह से मदद करेंगे क्योंकि हम किट से कवर होंगे। हर चीज का अल्टरनेटिव हमारे पास मौजूद है।

हम जो भी इक्विपमेंट यूज करेंगे उन्हें लैंड करने के बाद बायोहेजार्ड बैग में डालना है। इसकी संबंधित व्यक्ति को सूचना भी देनी है कि यहां यूज्ड इक्विपमेंट्स डाले गए हैं। फिर हम नए मास्क और ग्लव्स पहनकर ऑफिस जाएंगे। वहां से प्रोसीजर पूरा करके घर जाएंगे। घर जाकर भी बिना किसी चीज को टच किए सबसे पहले नहाएंगे और कपड़े चेंज करेंगे। इसके बाद ही किसी से मिलेंगे। इन सबके साथ ही कोरोनावायरस के जो नॉर्मल सेफ्टी मेजर्स हैं, वो हमें फॉलो करना ही है।

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प्रणव सूद, एयर एशिया में पायलट हैं। ये बताते हैं कि 25 मार्च को आखिरी बार एयरक्राफ्ट उड़ाया था लेकिन प्रैक्टिस बनी रहे इसलिए पिछले 2 महीनों में लगातार ट्रेनिंग होती रही है।


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