मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को फैसला लिया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ दिल्लीवालों का ही इलाज होगा। हालांकि, केंद्र सरकार के अधीन आने वाले अस्पताल सभी के लिए खुले रहेंगे।

लेकिन, फैसले के एक दिन बाद ही उपराज्यपाल अनिल बैजल ने केजरीवाल सरकार के इस फैसले को पलट दिया।

केजरीवाल के इस फैसले का कारण 5 डॉक्टरों की कमेटी की वो रिपोर्ट थी, जिसमें सिफारिश की गई थी कि दिल्ली में बाहरी लोगों को इलाज ना मिले, वरना तीन दिन में ही सारे बेड भर जाएंगे।

रिपोर्ट में ऐसी सिफारिश इसलिए क्योंकि, राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। covid19india.org के मुताबिक, दिल्ली में कोरोना के 7 जून तक 28 हजार 936 मामले आ चुके हैं। और 812 लोगों की मौत संक्रमण से हो गई है। फिलहाल, यहां 17 हजार 125 एक्टिव केस हैं।

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 83 कोविड अस्पताल हैं। इनमें 8 हजार 575 बेड हैं। इनमें से 4 हजार 413 बेड पर मरीज हैं, जबकि 4 हजार 162 बेड खाली हैं। यानी, जितने बेड हैं उनमें से अब 50% से भी कम ही खाली हैं।

83 कोविड अस्पतालों में 9 सरकारी और 74 निजी अस्पताल हैं। सरकारी की तुलना में निजी अस्पतालों के ज्यादातर बेड पर मरीज हैं।

निजी अस्पतालों में 2 हजार 887 बेड हैं, जिसमें से अब 937 यानी 32.5% बेड ही खाली हैं। जबकि, सरकारी अस्पतालों के 5 हजार 678 बिस्तरों में से 57% यानी 3 हजार 215 बेड खाली हैं।

इतना ही नहीं, यहां 518 वेंटिलेटर बेड में से 251 पर मरीज हैं, जबकि 267 ही खाली हैं।

इन सबके अलावा, 7 जून तक कोविड हेल्थ सेंटर में 101 और कोविड केयर सेंटर में 4 हजार 474 बेड खाली बचे हैं।

दिल्ली में कितने अस्पताल, कितने डॉक्टर?
सेंटर फॉर डिसीज डायनामिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी यानी सीडीडीईपी की रिपोर्ट बताती है कि हमारे देश में सिर्फ 69 हजार 264 अस्पताल ही हैं। इनमें से दिल्ली में सिर्फ 176 अस्पताल ही हैं। इनमें 109 सरकारी और 67 प्राइवेट अस्पताल हैं।

हमारे यहां न सिर्फ अस्पतालों की, बल्कि डॉक्टरों की भी कमी है। 30 सितंबर 2019 को लोकसभा में दिए जवाब में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया था कि देश में 12 लाख के आसपास एलोपैथिक डॉक्टर हैं।

इसके मुताबिक, दिल्ली में 24 हजार 999 डॉक्टर हैं। सबसे ज्यादा 1 लाख 79 हजार 783 डॉक्टर महाराष्ट्र में हैं। दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है। जहां 1 लाख 38 हजार 821 डॉक्टर हैं।

चिंता का एक कारण ये भी : हर 10 लाख में से 1460 संक्रमित
सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामलों में दिल्ली देश में तीसरे नंबर पर है। 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1.98 करोड़ के आसपास है।

दिल्ली में मामले भले ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कम हैं, लेकिन यहां हर 10 लाख आबादी में से 1 हजार 460 लोग संक्रमित हैं। ये आंकड़ा देश में सबसे ज्यादा है।

10 दिन में दिल्ली में टेस्ट घटे, लेकिन रोज हजार से ज्यादा मामले आ रहे
दिल्ली में 28 मई को पहली बार एक दिन में हजार से ज्यादा संक्रमित मिले थे। इस दिन यहां 1 हजार 24 मामले आए थे। इसके बाद से ही रोजाना हजार से ज्यादा नए मामले आ रहे हैं।

लेकिन, इसके बाद से ही दिल्ली में कोरोना के लिए होने वाले टेस्ट भी घटते रहे। 29 मई को तो यहां 7 हजार 649 लोगों की जांच हुई, लेकिन उसके बाद से यहां रोजाना टेस्ट की संख्या में कमी आने लगी।

1 जून को सिर्फ 4 हजार 753 लोगों के टेस्ट हुए, तो इस दिन 990 ही नए मामले आए।लेकिन, उसके अगले दिन 2 जून को 6 हजार 70 लोगों के टेस्ट हुए तो 1 हजार 298 मरीज मिल गए। इसी तरह 7 जून को यहां 5 हजार 42 टेस्ट हुए, लेकिन 1 हजार 282 नए मामले सामने आए।

इतना ही नहीं, पिछले 10 दिन में 59 हजार 938 लोगों की कोरोना जांच हुई है, इनमें से 12 हजार 655 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यानी, जितने लोगों के टेस्ट हुए, उनमें से 21% से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव निकले।

इसका मतलब यही हुआ कि कोरोना के नए मामलों की संख्या टेस्ट पर डिपेंड है। जितने ज्यादा टेस्ट होंगे, उतने ज्यादा नए मामले सामने आएंगे।

लेकिन, दिल्ली ऐसा राज्य जहां 10 लाख आबादी पर सबसे ज्यादा टेस्ट हुए
1 अप्रैल तक देश में हर 10 लाख लोगों में से सिर्फ 32 लोगों की ही जांच हो रही थी। लेकिन, अब ये आंकड़ा 3 हजार 581 पर पहुंच गया।

वहीं, राज्यों की बात करें तो दिल्ली ही ऐसा राज्य है जहां हर 10 लाख लोगों में से सबसे ज्यादा 12 हजार 714 लोगों की जांच हो रही है। दूसरे नंबर पत तमिलनाडु है, जहां हर 10 लाख में से 7 हजार 834 लोगों की जांच हुई है।



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