कोरोना के दौर में भी बाली को प्लास्टिक कचरे से बचाने में जुटीं विजसेन बहनें, बोलीं- अभी रुके तो मेहनत पानी में चली जाएगी

इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर इन दिनों दो लड़कियों के साथ बड़ी संख्या में स्कूली युवा और बच्चे प्लास्टिक कचरे को जमा करते देखे जा सकते हैं। ये दो लड़कियां मेलाती और इसाबेल विजसेन हैं। इन्होंने ही इंडोनेशिया को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने के लिए अभियान शुरू किया था।

मेलाती बताती हैं कि मानसून सीजन आते ही यहां पर समुद्र किनारे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो जाता है। इस बार कोरोनावायरस के कारण यह समस्या और भी बड़ी हो गई है। घर पर रहने की बंदिशें और डिस्टेसिंग के दौरान इस काम में सक्रिय रहना मुश्किल रहा। पर अगर हम काम रोक देते हैं, तो बरसों की मेहनत पानी में चली जाएगी।

मेलाती बताती हैं कि कोरोना के कारण सुरक्षा से लेकर पैकेजिंग तक हर जगह प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ गया है। ऐसे में हमें ज्यादा मेहनत करने की जरूरतत है। इन दिनों लोगों की आवाजाही कम है, इसलिए प्लास्टिक कचरे को हटाने का काम बेहतर ढंग से हो सकता है।

सरकारों को पर्यावरण के मुद्दे पर भी तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए- मेलाती

इसाबेल के मुताबिक, कोरोना के कारण लॉकडाउन से पर्यावरण को फायदा हुआ है। दोनों बहनें सरकार और लोगों से अनुरोध करती हैं कि जैसी लड़ाई वायरस के लिए लड़ रहे हैं, वैसी ही जलवायु परिवर्तन के लिए भी होनी चाहिए। सरकारों को पर्यावरण के मुद्दे पर भी तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि सरकारें इतना साहस दिखा पाएंगी? कोरोना के जरिए प्रकृति ने संभलने के संकेत दिए हैं, हमें इन्हें समझकर कदम उठाने ही होंगे।

दावोस में कह चुकी हैं- सिंगल यूज प्लास्टिक बैन के लिए दबाव बनाएं
मेलाती जनवरी में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) में थीं, वहां पर उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक बैन के लिए सरकारों और कंपनियों पर दबाव बनाने की बात कही थी। पर्यावरण के लिए दुनियाभर में अलख जगाने वाली दोनों बहनों का अभियान बाय बाय प्लास्टिक बैग्स 2013 में शुरू हुआ था। फरवरी में बाली का सबसे बड़ा सफाई अभियान चलाया। दोनों की कोशिशों ने बाली की सूरत बदल दी।



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मेलाती और इसाबेल, यह दोनों बहनें सरकार और लोगों से अनुरोध करती हैं कि जैसी लड़ाई वायरस के लिए लड़ रहे हैं, वैसी ही जलवायु परिवर्तन के लिए भी होनी चाहिए।


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